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March 12, 2016

Prof. Hari Dutt Sharma honored with the ‘President’s Certificate of Honour’ in 2015

A Sanskrit scholar and poet of International repute Prof. Hari Dutt Sharma is at present Professor in the Department of Sanskrit, University of Allahabad and has been Head of the Department. He was born in 1948 in the city Hathras, Uttar Pradesh. His mother was Smt. Harpyari Devi and father Shri. Lahari Shankar Sharma. His earlier education was held in Hathras and higher education in Allahabad University. He won six gold and silver medals for standing first in merit in M.A. examination here. He obtained D.Phil degree after doing research on the Bhavas in Sanskrit poetics. In 1972 Dr. Sharma was appointed in the University of Allahabad and worked as Lecturer, Reader and Professor. So far 28 research works have been conducted under the supervision of Dr. Sharma. Prof. Sharma had authored 12 books to his credit both creative and critical. 60 of his research papers have been published in the journals of high repute. His main works are-- Samskrta-1de433333Kāvyaśāstrīya Bhāvom kā Manovaijñānika Adhyayana, Gītakandlikā, Tripthagā, Utkalikā, Bālagītālī, Ākrandanam, Lasallatikā, Naveksikā, Glimpses of Sanskrit Poetics and Poetry etc. He received Uttar Pradesh Sanskrit Sansthan Award on 5 of his books, Delhi Sanskrit Akademi Award on 1 book and prestigious Sahitya Akademi Award on 1 book Lasallatikā. He got ‘Vishishta Puraskar’ from U.P. Sanskrit Sansthan in 2012. Prof. Sharma has visited 15 foreign countries on academic and cultural tour. The main countries are-- Germany, France, Netherlands, Austria, Malaysia, Indonesia, Italy, America, Mauritius, Scotland, Thailand and Japan. He visited Germany and France under the ‘Cultural Exchange Programme’ of the U.G.C. He was Visiting Professor in the Silpakorn University, Bangkok, Thailand for 3 years on deputation through the I.C.C.R. He actively participated in 25 International and 20 National Conferences, and 80 Seminars. He has been and is member of high administrative and academic committees in several universities. His books are prescribed in courses of many universities and various research works have been and are being conducted on them. In 2012 he was elected Vice-President of the ‘All India Oriental Conference’ and he is a reputed member of the ‘Consultative Committee’ of the ‘International Association of Sanskrit Studies’. He has been honoured with the ‘President’s Certificate of Honour’ in 2015.

प्रो0 हरिदत्त शर्मा 2015 में प्रतिष्ठित 'राष्ट्रपति सम्मान' से अलङ्कृत किये गए हैं

संस्कृत के अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान् एवं कवि हरिदत्त शर्मा सम्प्रति संस्कृत-विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हैं तथा पूर्व में विभागाध्यक्ष रह चुके हैं। उनका जन्म वर्ष 1948 में उत्तर प्रदेश के हाथरस नगर में हुआ। उनकी माता श्रीमती हरप्यारी देवी एवं पिता श्री लहरी शङ्कर शर्मा थे। उनकी आरम्भिक शिक्षा हाथरस में हुई तथा उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में। यहाँ एम0ए0 संस्कृत परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर उन्हें छः स्वर्ण एवं रजत पदक प्राप्त हुए। यहीं पर उन्होंने संस्कृत-काव्यशास्त्रीय भावों पर शोध कर डी0 फिल्0 उपाधि प्राप्त की। सन् 1972 में डा0 शर्मा की नियुक्ति इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हो गई और वहीं उन्होंने प्रवक्ता, उपाचार्य एवं आचार्य के रूप में कार्य किया। डा0 शर्मा के निर्देशन में अब तक 28 शोध-कार्य सम्पन्न हो चुके हैं। प्रो0 शर्मा ने रचनात्मक एवं आलोचनात्मक क्षेत्र में 12 ग्रन्थों का लेखन किया है तथा प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में उनके 60 शोध-निबन्ध प्रकाशित हो चुके हैं। उनके प्रमुख ग्रन्थ हैं-संस्कृत-काव्यशास्त्रीय भावों का मनोवैज्ञानिक अध्ययन, गीतकन्दलिका, त्रिपथगा, उत्कलिका, बालगीताली, आक्रन्दनम्, लसल्लतिका, नवेक्षिका, Glimpses of Sanskrit Poetics and Poetry आदि। उनकी पाँच मौलिक रचनाओं पर उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, एक रचना पर दिल्ली संस्कृत अकादमी तथा एक रचना 'लसल्लतिका' पर साहित्य अकादेमी, दिल्ली की ओर से प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए। 2012 में उन्हें उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान का 'विशिष्ट पुरस्कार' प्राप्त हुआ। प्रो0 शर्मा 15 देशों की शैक्षणिक-सांस्कृतिक यात्रा कर चुके हैं, जिनमें प्रमुख देश हैं- जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैण्ड्स, आस्ट्रिया, मलेशिया, इण्डोनेशिया, इटली, अमेरिका, मारिशस, स्काटलैण्ड, थाइलैण्ड, जापान। यू0जी0सी0 के 'कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम' के अन्तर्गत वे जर्मनी एवं फ्रांस गए तथा आई0सी0सी0आर0 द्वारा प्रतिनियुक्ति पर थाइलैण्ड की राजधानी बैंकाक में स्थित 'शिल्पाकार्न यूनिवर्सिटी' में वे तीन वर्ष तक 'विजि़टिंग प्रोफेसर' के रूप में कार्यरत रहे। उन्होंने अब तक 25 अन्तर्राष्ट्रीय, 20 राष्ट्रीय सम्मेलनों तथा 80 संगोष्ठियों मे भाग-ग्रहण किया है। वे अनेक विश्वविद्यालयों की उच्च प्रशासनिक एवं शैक्षणिक समितियों के सदस्य रहे हैं और हैं। उनकी रचनाएँ अनेक विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में निर्धारित हैं तथा उन पर अनेक शोध-कार्य हुए हैं और हो रहे हैं। वे 2012 में 'आल इण्डिया ओरियण्टल कान्फ्रेंस' के उपाध्यक्ष पद पर रह चुके हैं तथा वे 'इण्टरनेशनल एसोसिएशन आफ संस्कृत स्टडीज़' की 'कन्सल्टेटिव कमेटी' के सम्मानित सदस्य हैं। प्रो0 शर्मा 2015 में प्रतिष्ठित 'राष्ट्रपति सम्मान' से अलङ्कृत किये गए हैं।


Professor Hari Dutt Sharma, formerly the Head of Sanskrit Department, UoA, has been conferred the Certificate of Honour by the President of India, Shri Pranab Mukherjee, in recognition of his outstanding contribution for the cause of Sanskrit.  A Sahitya Akademy Award winner for his creative work of poetry, Lasallatika in Sanskrit in 2007, Prof. Sharma has already won laurels for his earlier academic visits to more than a dozen foreign countries. He has earned distinction of having chaired many international conferences on Sanskrit and has presented numerous research papers of great scholastic merit.

The University feels honoured to find Prof. Sharma’s monumental literary endeavours to have been recognised by the Hon’ble President of India.

In a communication received from Joint Secretary, Ministry of Human Resources vie letter no. D.O.No.F.11-1/2015-Skt.II, the date of the Award Investiture Ceremony is likely to be announced by the Rashtrapati Bhawan in the month of January 2016.

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