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Joint Registrar (Exam.) A.U.

Programme of M.A. IIIrd. Semester (Film and Theatre) Examination 2016-2017

M.A.in IIIrd Semester (Film and Theatre) Semester (Old Course)

Place: Department of Film & Theatre

Time: 10:00am to 01:00pm

Date

Paper

Subject

24.05.2017

Paper-1

Cinematography

25.05.2017

Paper-2

Documentary

26.05.2017

Paper-3

Film Analysis/ Criticism/ Journalism

28.05.2017

Paper-4

Indian cinema with area of Specialization- Dissertation- Viva Time: 12:00noon to 02:00pm

निदेशक, इन्स्टीट्यूट आॅफ प्रोफेशनल स्टडीज, इ0वि0वि0ः

मीडिया की सबसे बड़ी पहचान उसका जनता से जुड़ाव होना होता है। वास्तव में मीडिया की जिम्मेदारी जनता के प्रति होती है न कि सत्ता के प्रति। मीडिया के विद्यार्थियों को संविधान की जानकारी होनी भी जरूरी है। ऐसा होने पर ही वे जिम्मेदार पत्रकार बन सकते हैं। यह बात प्रख्यात रेडियो विशेषज्ञ व आकाशवाणी, नई दिल्ली की रिपोर्टिंग व फीचर यूनिट की पूर्व प्रमुख सरिता बरारा ने कही। सुश्री बरारा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेन्टर आॅफ मीडिया स्टडीज में सोलह दिवसीय ‘‘समर स्कूल आॅन रेडियो’’ और ‘‘समर स्कूल आॅन वीडियो प्रोडक्शन’’ का उद्घाटन कर रहीं थीं। ये समर स्कूल बी.वोक. व एम.वोक. इन मीडिया स्टडीज के विद्यार्थियों के लिए आयोजित किये गये हैं।सुश्री बरारा ने कहा कि बदलते समय में रेडियो का विस्तार लगातार हो रहा है और यही वजह है कि नई पीढ़ी को रेडियो के लिए तैयार किया जाना जरूरी है। यह भी सच है कि रेडियो की पहुँच बढ़ रही है और यह एक बार फिर आम आदमी का मीडिया बनता जा रहा है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि आने वाला समय रेडियो इण्डस्ट्री की बेहतरी का समय होगा। उन्होंने कहा कि रेडियो एक ऐसा मीडिया उपक्रम है जिसमें क्रिएटिविटी और इंटरैक्टिविटी की अपार संभावनाएं होती हैं। नये रेडियो चैनलों के आने से मीडिया के इस क्षेत्र में रोजगार भी बढ़ेंगे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए इंस्टीट्यूट आॅफ प्रोफेशनल स्टडीज की निदेशक प्रो. नीलम यादव ने कहा कि मीडिया के विद्यार्थियों की सबसे बड़ी विशेषता अपने काम के प्रति समपर्ण और समयबद्धता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विविधता बढ़ी है और इसका भरपूर लाभ विद्यार्थियों को उठाना चाहिए। इस समर स्कूल में नई दिल्ली से आये सीनियर फिल्म मेकर मतिउर्रहमान तथा वीडियोग्राफर पूनम चैरसिया ने प्रशिक्षण प्रारम्भ किया। श्री रहमान ने विद्यार्थियों को डाक्यूमेंट्री तैयार करने के टिप्स दिये और टेलीविजन की दुनिया में हो रहे तकनीकी परिवर्तनों से रूबरू कराया। कार्यक्रम के प्रारम्भ में सेण्टर के कोर्स कोआर्डिनेटर डा. धनंजय चोपड़ा ने पन्द्रह दिवसीय समर स्कूल की रूपरेखा रखते हुए बताया कि ये समर स्कूल बी. वोक. व एम. वोक. पाठ्यक्रम के हिस्से हैं जिसमें मीडिया इण्डस्ट्री के जाने माने विशेषज्ञ विद्यार्थियों को ट्रेनिंग देंगे। समर स्कूल में जो प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित रहेंगे उनमें बी.बी.सी., नई दिल्ली के डेस्क एडिटर रेहान फैजल, आकाशवाणी, नई दिल्ली की उप निदेशक व एफ.एम. गोल्ड की पूर्व प्रमुख रितु राजपूत, एनडीटीवी नई दिल्ली के न्यूज एडिटर प्रियदर्शन व वरिष्ठ संवाददाता कमाल खान, एफ.एम. विशेषज्ञ व आकाशवाणी के एम. चैनल रेनबो, लखनऊ के प्रभारी अनुपम पाठक, एमएच वन न्यूज चैनल के शरद अवस्थी, फ्रीलांस फिल्म मेकर अभिनय खोपरजी सहित इलाहाबाद के कई रेडियो व टेलीविजन पत्रकारिता के विशेषज्ञ, रेडियो पत्रकार व रेडियो जाॅकी शामिल हैं। आभार ज्ञापन सेन्टर के अध्यापक एस.के. यादव ने किया। इस अवसर पर विद्या सागर मिश्र, सचिन मेहरोत्रा, अमित मौर्या, डा0 रितू माथुर आदि उपस्थित रहे।

 

Head, Department of Arabic &Persian A.U.

Department of Arabic & Persian in collaboration with Shri Krishna Siksha Evam Sanskriti Pracharini Sanstha organized a lecture on “Panchtantra and its Relevance in Today’s Context”. It was delivered by eminent Arabic scholar Prof. Abdul Ali, Ex-HoD Islamic Studies, Aligarh Muslim University and was presided over by Prof. Umakant Yadav, Dept. of Sanskrit, AU Prof. Abdul Ali spoke on the chapters of Panchtantra thoughrly. He said in his speech that the king wanted to teach his 3 perturbed foolish sons and responsibility was given to an eminent scholar of that Mr. Vishnu Sharma to take them under his custody. He said the book was compiled in Kashmir. He also emphasize on its importance and impact on the other languages. He also said that this book played an important role in the development of modern literatures as well as languages. He said it was translated more than 200 languages of the world. It gives political and ethical knowledge. Prof. Umakant Yadav, Dept. of Sanskrit depicted the real picture of modern politics in view of Panchtantra. Dr. Saleha Rasheed, HoD, Arabic & Persian welcomed the guests and introduced the topic to the audience. She said in her introduction that the importance of Panchtantra is as relevant today as it was in the ancient period. It gives us an inspiration of reading and making a difference between good and bad friends.  A large number of University faculty, Staff, students of Dept. of Sanskrit and Arabic/Persian and eminent citizens were present on the occasion.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अरबी और फारसी विभाग और श्रीकृष्ण शिक्षा एवं संस्कृति प्रचारिणी सभा, प्रयाग के संयुक्त तत्वावधान में ’’वर्तमान परिप्रेक्ष्य में ’पंचतन्त्र’ की प्रासंगिकता’’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रो0 अब्दुल अली, भूतपूर्व विभागाध्यक्ष, अरबी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने पंचतन्त्र को भारतीय वांगमय की मूल धरोहर के रूप में रेखांकित करते हुए नैतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण ग्रन्थ माना तथा कहा कि पंचतन्त्र के अध्ययन से नैतिक मूल्यों को विकसित करने में मदद मिलती है।  अपनी प्रस्तुति मे पंचतन्त्र के अध्यायों पर विस्तृत प्रकाश डाला और इसके महत्व और अन्य भाषाओं पर प्रभाव पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस किताब ने आधुनिक साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। पंचतन्त्र सम्पूर्ण मानव जाति को राजनीतिक और नैतिक ज्ञान देता है। इसका महत्व इससे लगाया जा सकता है कि इस किताब ें अनुवाद 200 से अधिक भाषाओं मे किया गया। मुख्य अतिथि प्रो0 उमाकान्त यादव, संस्कृत विभाग, ने कहा कि पंचतन्त्र में नीतिकथा विधा का प्रमुख ग्रन्थ है। इसमें कहानियों के माध्यम से पशुपात्रों द्वारा मानव स्वभाव एवं मानव जगत का यथार्थ चित्रण है। इसकी प्रत्येक कथा रमणीय रूप में एक जीवन दर्शन लेकर आती है। व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास में पंचतन्त्र आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना पुरा काल में। विभागाध्यक्ष डा0 सालेहा रशीद ने अतिथियों का स्वागत किया तथा विषय के बारे में जानकारी दी उन्होंने बताया कि पंचतन्त्र पशुकथाओं की परम्परा का सबसे अधिक लोकप्रिय ग्रन्थ है। साथ ही कहानी की संभावना और शक्ति तथा उसके माध्यम से मनुष्य की गरिमा और उदात्तता को प्रस्तुत करने मे पूर्ण सार्थक एवं समर्थ है। इस अवसर पर विभाग के शिक्षक, शोधछात्र छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।