logo
ZHindi Text
Dean, Faculty of Commerce, AU
Regional Seminar on "Financial Inclusion through Financial Education" on February 12-13, 2018 is being organized by the Faculty of Commerce. The seminar is sponsored by Securities and Exchange Board of India, National Stock Exchange of India, AMFI and SBI Mutual Fund. The coordinator of the seminar is Dr. Shefali Nardan.
All the faculty members are cordially invited to attend the seminar.
Research scholars of Economics and students oF MA (Economics) Sem IV may attend the Seminar on 12 February 2018.
Venue:  Rajshekhar Hall, MONIRBA 
Timings:
12 February 2018 - 11.00 am -5.00 P.M 
13 February 2018 - 10.00 am -5.00 P.M 
 
 
Convener, Department of Commerce & Business Administration, AU:
The final list of CRET-2017 has been declared. The list of selected candidate id pasted on the Department Notice Board and also on the University Website
 
 
निदेशक, आई0पी0एस0, इ0वि0वि0ः
इलाहाबाद। सेंटर आॅफ फूड टेक्नोलाॅजी, इलाहाबाद विश्वविद्यालय तथा एसोशिएशन आफ फूड सांइटिस्ट्स एण्ड टेक्नोलाॅजिस्ट्स के संयुक्त तत्वावधान में दो दिनों तक चली नेशनल फूड कान्फ्रेंस इस आशा के साथ सम्पन्न हो गई कि आने वाले दिनों में फूड प्रोसेसिंग, पब्लिक हेल्थ न्यूट्रीशन और फूड सेफ्टी से जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं के लिए फूड साइंटिस्ट्स व टेक्नोलाॅजिस्ट्स मिल कर काम करेंगे। समापन कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि उ.प्र. काउंसिल आॅफ एग्रिकल्चरल रिसर्च, लखनऊ के पूर्व महानिदेशक प्रो. राजेन्द्र कुमार थे तथा अध्यक्षता बनारस हिन्दू युनिवर्सिटी के प्रो. सी. पी. मिश्रा ने की।
दो दिनों तक चली इस नेशनल कान्फ्रेंस के तकनीकि सत्रों में फूड टेक्नोलाॅजी व न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। इनमें प्रमुख रूप से ‘फूड प्रोसेसिंग की प्रमुख चुनौतियां ‘सस्टेनेबल एग्रिकल्चर फाॅर फूड एण्ड न्यूट्रीशनल सिक्योरिटी’, ‘पब्लिक हेल्थ न्यूट्रीशन’, ‘इनोवेशन इन फूड सप्लीमेंटशन फाॅर अण्डरनरिश्ड चिल्ड्रेन’, ‘एडवान्सेस इन फूड सेफ्टी एण्ड फूड अथेन्टिकेशन’, ‘फूड इंजीनियरिंग एण्ड फूड प्रोसेसिंग टेक्नीक््स’, तथा ‘पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नोलाॅजी एण्ड वेल्यू एडिशन’ शामिल हैं। तकनीकि सत्रों में एसोसिएशन आॅफ फूड सांइटिस्ट्स एण्ड टेक्नोलाॅजिस्ट्स इण्डिया के अध्यक्ष डा. प्रबोध हाल्दे, उपकार लखनऊ के पूर्व महानिदेशक प्रो. राजेन्द्र कुमार, सरदार वल्लभ भाई पटेल युनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. एम. पी. यादव, बी.एच.यू. के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के प्रो. सी. पी. मिश्रा, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के जैव रसायन विभाग के प्रो. एस. आई. रिजवी, आई आई टी खड़गपुर के प्रो. एच. एन. मिश्रा, भास्कराचार्य काॅलेज आॅफ अप्लाइड साइंसेज, नई दिल्ली की प्रो. एरम राव, उपकार लखनऊ के वैज्ञानिक अधिकार डा. सुजीत कुमार, आई सी ए आर, नई दिल्ली के वैज्ञानिक डा. डी ढींगरा, डी एफ आर एल मैसूर के डा. ओ. पी. चैहान, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर आॅफ बायो टेक्नोलाॅजी के प्रो. एम.पी. सिंह तथा सिफेट लुधियाना के पूर्व निदेशक डा. आर.टी. पाटिल के विशेष ब्याख्यान हुए।
नेशनल कान्फ्रेंस के अंत में कान्फ्रेंस की संयोजक तथा इंस्टीट्यूट आॅफ प्रोफेशनल स्टडीज की निदेशक प्रो. नीलम यादव ने कान्फ्रेंस की आख्या प्रस्तुत की। आभार ज्ञापन कान्फ्रेंस सचिव डा. पिंकी सैनी ने किया। कान्फ्रेंस के दौरान देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों व संस्थानों से आये शोधार्थियों व विद्यार्थियों के बनाये पोस्टर भी आकर्षण का केन्द्र रहे।

 

Head, Department of Centre of Behavioral and Cognitive Sciences, AU:
The academic community of the University of Allahabad, is grieved to hear about the untimely death of Prof. V.C. Chandrasekhar pammi. He passed away on the night of 11th February, 2018 due to cardiac arrest. Prof Pammi was 42 years of age and hailed from Dubacharla village, west Godavari District, Andhra Pradesh. He is survived by his wife Mrs. Bhanu Nittela and a seven years old son Bhargav Ram Pammi. He joined the Centre of Excellence for Behavioral and Cognitive Sciences (CBCS), University of Allahabad in 2009, as a Reader and achieved Professorship in 2015. Prof. Pammi did his Ph.D. in Computer Science, from University of Hyderabad and served as a post doctoral fellow at Max Plank Institute, Tubingen, Germany, Amory University, U.S.A and ATR labs in Kyoto Japan. He was an expert of the most sophisticated Fmri technique and had recently collaborated with SGPGI, Lucknow and his research was focused on cognitive computational neuroscience aspect of decision making. He was a member of editorial board of leading Neuroscience and psychology journals. The founder head of CBCS, Prof. Janak Pandey said the nation
lost a highly promising Cognitive Scientist.