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कुलपति की कलम से

Since antiquity Allahabad has been rightly described as a sacred city. It is also the heart of the Indo-Gangetic plain with a multicultural mosaic. It is a place where nature chooses to converge Ganga, Yamuna and Saraswati into Sangam that attracts billions from all over the world to seek spiritual solace and peace. In this sacred space as India advanced towards modernity, it gave birth to one of the most important institutions of the world - Allahabad University. This seat of higher learning soon acquired the rare distinction of producing students who guided and continue to guide the destiny of India in a variety of ways. Read more

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इतिहास

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने एक सदी से अब तक भारत के विश्वविद्यालयों में सदैव एक सम्मानित स्थान पाया है। सितम्बर 23, 1887 में स्थापित यह विश्वविद्यालय कोलकाता, मुम्बई और मद्रास विश्वविद्यालय के बाद भारत का चौथा सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय है। इलाहाबाद में एक बृहद केंद्रीय कॉलिज को आखिरकार एक विश्वविद्यालय में विकसित करने की कल्पना का श्रेय संघ प्रांतों के तत्कालिन उप राज्यपाल सर विलियम मुइर को जाता है। उनकी पहल के परिणामस्वरुप मुइर सेंट्रल कॉलिज (जिसका नामंकरण उनके बाद किया गया) की आधारशिला ने एक सदी से अब तक भारत के विश्वविद्यालयों में सदैव एक सम्मानित स्थान पाया है। सितम्बर 23, 1887 में स्थापित यह विश्वविद्यालय कोलकाता, मुम्बई और मद्रास विश्वविद्यालय के बाद आगे पढे़