A- A A+
A
A
logo
Head, Department of Biochemistry, AU
Final Result of CRET 2018-Level II Test (Departmental Interview) In Biochemistry
List of successful candidates for admission in D.Phil/Ph.D is given below. Candidates should consult the respective supervisors for onward action.
S.N.
Roll No.
Candidate Name
Category
Supervisors Assigned
 
1
900172
RUPALI SRIVASTAVA
General
Prof. A. K. Pandey
2
900168
 
JITENDRA KUMAR ARYA
OBC (Admitted in General Category)
Prof. S.I. Rizvi
3
900171
 
RISHABH KUMAR
OBC(Admitted in General Category)
Dr.Munish Kumar
4
900169
JYOTSNA JAISWAL
OBC
Prof. B. Sharma
5
902521
VINAY PRATAP
 
SC
Dr.Jalaj Kumar Gour
 
 
Head, Department of Ancient History, AU
The lists of Non-JRFcandidates (CRET-2018) who have been shortlisted for the Level II of CRET-2018 has been pasted on the notice board of  Ancient History Department, along with all eligible JRF candidates, these short-listed are required to submit self attested photocopied of the following documents by 12th October, 2018. in the office of Ancient History, Culture and Arcaeology Department
 
DOCUMENTS REQUIRED
  1. Duly filled-in and signed prescribed fprm available in the office of the Department.
  2. High School and Intermediate Mark Sheet & Certificate 
  3. U.G and P.G mark sheet and Degrees
  4. Admit card / Score card
  5. Aadhar Card 
  6. Latest Cast Certificate (OBC, SC and ST, wherever applicable)
  7. JRF Certificate ( Wherever applicable))
  8. Three copies of synopsis (Typed or neatly written detailed research methodology about proposed research topic by the candidates either in Hindi or English)
Note: Only those eligible JRF/Shortlisted candidates who submit the above documents latest by 12 Oct, 2018 will be considered for the Level-II Examination of CRET-2018
 
अध्यक्ष, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास, इ0वि0वि0ः
मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के आर.पी. त्रिपाठी  सभागार में विभाग के पूरा छात्र और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक श्री आनंद पांडे ने "भारत और चीन का उदयः एक विश्लेषण" विषयक व्याख्यान दिया। आनंद पांडे जी ने बताया कि भारत और चीन दोनों ही विश्व की प्राचीनतम सभ्यताएं हैं और वर्तमान समय पर वह विश्व अर्थव्यवस्था में वर्चस्व स्थापित करने की कगार पर हैं । ऐसा अनुमान लगाया गया कि 2030 तक भारत और चीन की सामूहिक अर्थव्यवस्था विश्व अर्थव्यवस्था क लगभग 60%के हिस्सेदार बन जाएगी। यहाँ चिंता की बात यह है कि जहां एक और चीन का आर्थिक विकास  संयमित ,सुनियोजित, और प्रभावशाली है वहीं भारत का आर्थिक विकास कुछ आकस्मिक अनुकूल परिस्थितियां जैसे "जनसंख्या लाभांश" पर आधारित है ।आगे उन्होंने यह बताया कि चीन में कन्फ्यूशियस धर्म के प्रभाव के चलते लोगों में निर्णय को क्रियान्वित करने के समय दुविधा नहीं होती और जिस रणनीति पर मोहर लग जाती है तो उस काम को पूरा कर लिया जाता है।  वहां का राज्य बहुत मजबूत है जिससे कि कठोर परंतु देश के लिए लाभकारी निर्णय के लेने के बाद सरकार पीछे नहीं हटती जबकि भारत में प्रजातांत्रिक राजनीतिक प्रणाली होने की वजह से क्रियान्वयन में दुविधा और हिला हवाली हो जाती है ।चीनी सरकार और चीनी बुद्धिजीवी भारतीय समाज और व्यक्तित्व को नकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं । श्री पांडे जी के व्याख्यान के पश्चात छात्रों ने उनसे कई प्रश्न पूछे । विभागाध्यक्ष प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी ने इस बात पर बल दिया कि श्री पांडे जी की कई बातें विवादास्पद हैं और  उन पर और अधिक चिंतन- मनन करने की आवश्यकता है| डॉ आलोक प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।  कार्यक्रम में मुख्य रूप से डॉक्टर विक्रम हरिजन, डॉक्टर पी.एस. हरीश, डॉक्टर भावेश त्रिवेदी, डॉक्टर अनिल यादव, डा. जेबा नक्वी,डॉ विजय मद्धेशिया, डॉ अचल त्रिपाठी और अरुण कुमार सहित भारी संख्या में छात्र और छात्राओं ने भाग लिया।