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National Conference on Cashless Economy and Financial Inclusion in India: Issues and Challenges

The second day of the National Conference began with a panel discussion on ‘Impact of Cashless Economy on Financial Inclusion’ chaired by Dr. Rajeev Ranjan, Officer-in-Charge, DEPR, RBI. The chairperson introduced the debate issue “less cash vs cash less” wherein he expressed his concern highlighting that it is practically impossible to take cash out of the economy fully. He also highlighted various schemes and services announced by the Government and RBI with respect to financial inclusion prior and later to demonetisation.

Taking the panel discussion ahead Prof. A.R. Tripathi, former Head and Dean, Faculty of Commerce, BHU, drew the attention of the gathering towards the functioning and shifting focus of banking sector pre and post liberalisation. Post liberalisation the focus of the banking sector has shifted towards market mechanism from mass banking. He also enlightened the gathering that how multiplier effect can be achieved through banking transaction.   

Prof. S.A. Ansari, Department of Commerce and Business Administration, AU, during his address raised the burning issues of security of Aadhaar data.  He disagreed with the opinion that cashless economy can promote growth despite of the advantage of increased efficiency in tax collection.

Shri Rajeev Jaitely, DDM, NABARD, Allahabad, comprehensively defined the term financial inclusion by not only confining it to opening of bank account but also including other financial products like loans insurance remittances. He discussed about how the trinity of Jan-Dhan, Aadhaar, Mobile (JAM) and direct benefit transfer (DBT) can effectively minimise the leakages in social security of programs and subsidies. He highlighted that in order to make the quest of cashless economy into a success, we require to improve the technical know-how and financial literacy amongst the population.

Prof. S.K. Shukla, Head, Department of Economics, Jiwaji University, Gwalior clarified the concept of cash and money. He advised the RBI to revise the monetary and liquidity aggregate by including e-wallet balance. Advocating financial inclusion he recommended that the focus should shift from just opening of bank account to insurance and equity services.

Post completion of panel discussion, the chairperson Dr. Rajeev Ranjan concluded the discussion by summing up that cashless economy is an ambitious dream and far from the common people.

Two technical sessions were conducted on “Cashless Economy and Financial Literacy” and “Cashless Economy and Marginalised Section”.

The valedictory function commenced with welcome address by Prof P. K. Ghosh, Department of Economics, AU, Dr. Pradeep Kumar Singh, conference coordinator presented the conference summary. Honourable Chief Guest Prof. Sanjay Deshmukh, former vice chancellor, Mumbai University, delivered the valedictory address. Prof. M. Muzammil, Former Vice Chancellor of Agra University and Rohilkhand University and Shri R.K. Uniyal, former AGM, SBI, graced the occasion by their presence as Guests of Honour. The presidential address was delivered by Prof. G.C. Tripathi, Head Department of Economics and Former Vice Chancellor, BHU. The function was finally concluded by Dr Deepshikha Sonker, Conference Coordinator and conveyed vote of thanks. Dr. Karimullah, organising secretary was also present in the function. After the valedictory session, the department also organised the 5th alumni meet.

 Prof. U.S. Rai, Prof. Jagdish Narayan, Prof. M.M. Krishna, Prof. P.K. Ghosh, Prof. Nisha Shrivastva, Shri Javed Akhtar, Dr. Kiran Singh, Dr. Anup Kumar, Dr. Swathi Jain, Dr. Rekha Gupta, Dr. Dharamnath Uraon were also present. Research scholars of the Department of Economics also actively participated in the conference.     


इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन 24 मार्च 2018 प्रेस रिपोर्ट समापन समारोह
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा ’’भारत में नकदी रहित अर्थव्यवस्था तथा वित्तीय समावेशन’’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का दूसरा दिन ’’वित्तीय समावेशन पर नकदी रहित अर्थव्यवस्था का प्रभाव’’ विषय पर आयोजित पैनल चर्चा के साथ आरम्भ हुआ। जिसकी अध्यक्षता डाॅ0 राजीव रंजन (सलाहकार, आर्थिक तथा नीतिगत शोध विभाग) ने की। इस सत्र में प्रो0 ए0 आर0 त्रिपाठी (सेवा निवृत्त विभागाध्यक्ष और अधिष्ठाता, वाणिज्य, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय), प्रो0 ए0 एस0 अंसारी (वाणिज्य एवं व्यापार प्रशासन विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय), श्री राजीव जेटली (डी0 डी0 एम0, नाबार्ड, इलाहाबाद) एवं प्रो0 एस के शुक्ला (विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, जीवाजी विश्वविद्यालय, ग्वालियर, मध्यप्रदेश) ने हिस्सा लिया सत्र की शुरुआत करते हुए डाॅ0राजीव रंजन ने रिजर्व बैंक आफ इंडिया द्वारा कम नकदी युक्त अर्थव्यवस्था की दिशा में उठाये जाने वाले विभन्न कदमों की चर्चा करते हुए आर्थिक संवृृद्धि के लाभों को वंचित वर्गाें तक पहुंचाये जाने की बात पर बल दिया। जिसके तहत उन्होने लकी ग्राहक योजना, वित्तीय आंकड़ों की निगरानी और भीम ऐप जैसी डिजिटल भुगतान सुविधाओं को प्रोत्साहित करने पर बल दिया। इसके बाद बी0 एच0 यू0 के प्रो0 ए0 आर0 त्रिपाठी ने अपने वक्तव्य का आरम्भ बाबा विश्वनाथ के चरणों मंे मंत्रांजलि अर्पित करने के साथ किया। अपने वक्तव्य में उन्होंने युवा भारत की क्षमताओं को चिन्हीकृत किये जाने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में सम्पादित होने वाले समस्त लेनदेनों की बारम्बारता पर बल दिया, साथ ही उन्होंने अपने वक्तव्य में महाभारत काल के यक्ष-युधिष्ठिर संवाद के बारे में बताते हुए अर्थव्यवस्था में जन्म लेने वाली साधन लागतों तथा ऋण लागतों के बारे में भी बताया। तत्पश्चात् इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रो0 एस0 ए0 अंसारी ने वर्तमान व्यापारिक बैंकों की तुलना किराने की दुकान से करते हुए बैंकों को उत्तरदायित्व पूर्ण रवैया अपनाये जाने की बात कही। उन्होंने अपने वक्तव्य में वर्तमान सरकार के द्वारा उठाये जाने वाले विमुद्रीकरण जैसे फैसले को आड़े हाथों लेते हुए इसके पीछे निहित काले धन की समाप्ति, आतंकवाद पर रोक तथा नकली नोटों से अर्थव्यवस्था को मुक्त किये जाने के उद्देश्यों से कोसों दूर रह जाने की बात कही। तदोपरान्त प्रो0 एस0 के0 शुक्ला अपने वक्तव्य में मुद्रा एवं नकदी में भेद करते हुए अर्थव्यवस्था में मुद्रा उपलब्धता के मापन के लिए आर0 बी0 आई0 द्वारा अपनाये जाने वाले तरीकों को पुनर्समायोजित किये जाने की बात पर बल दिया। इसके बाद श्री राजीव जेटली ने अपने वक्तव्य में वित्तीय समावेशन को गरीबी से जोड़ते हुए बताया कि इसका सम्बन्ध बैंकिंग सेवाओं की पहुंच तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह वास्तव में वित्तीय सेवाओं को उपयोग करने की क्षमता से सम्बन्धित है। पैनल चर्चा का समापन डाॅ0 अनूप कुमार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इसके बाद ’नकदी रहित अर्थव्यवस्था एवं वित्तीय साक्षरता’ तथा ’नकदी रहित अर्थव्यवस्था एवं वंचित वर्ग’ विषयों पर दो तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया। अन्त में समापन समारोह का आयोजन किया गया जिसमें अर्थशास्त्र विभाग के वरिष्ठ प्रो0 पी0 के0 घोष ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। सम्मेलन संयोजक प्रदीप कुमार सिंह ने सम्मेलन का सार संक्षेप प्रस्तुत किया। मुम्बई विश्वविद्यालय के भुतपूर्व कुलपति प्रो0 संजय देशमुख ने बतौर मुख्य अतिथि समापन वक्तव्य प्रस्तुत किया जबकि भारतीय स्टेट बैंक के भूतपूर्व ए0 जी0 एम0 श्री रजनीकांत उनियाल और आगरा एवं रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के भूतपूर्व कुलपति एम0 मुजम्मिल गेस्ट आॅफ आनर रहे। विभागाध्यक्ष, अर्थशात्र विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय, प्रो0 जी सी त्रिपाठी ने अध्यक्षता भाषण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अन्त में सम्मेलन समन्यवक डा0 दीपशिखा सोनकर ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के आयोजक सचिव डाॅ0 करीममुल्लाह सम्मेलन के समापन के पश्चात् विभाग में पांचवें पुरा छात्र सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रो0 यू0 एस0 राय, प्रो0 जगदीश नारायण प्रो0 मनमोहन कृष्णा, प्रो0 पी0 के0 घोष, प्रो0 निशा श्रीवास्तव, श्री जावेद अख्तर, डाॅ0 किरन सिंह, डाॅ0 अनूप कुमार, डाॅ0 स्वाती जैन, डाॅ0 धर्मनाथ उराॅव तथा डाॅ0 रेखा गुप्ता ने कार्यक्रम में शिरकत की। विभाग के सभी शोध छात्र/छात्राओं ने कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।