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Head, Department of Philosophy, AU:
On 14th March 2018 Porf. Sharad Desh Pandey, Former Professor, University of Pune, would deliver a lecture on “Dreaming A Reconciled Universal” at 11:00am in the North Hall, Senate Hall Campus, University of Allahabad. All the research scholars and those interested in Philosophy are requested to Participate in the event.
 
अध्यक्ष, हिंदी विभाग, इ0वि0वि0ः
                                       युध्द एक बडा उद्योग है और यह स्त्रियों के खिलाफ है। प्रो0 गरिमा श्रीवास्तव
सामान्यतः यूरोप आधुनिकता के एक आदर्श के रूप में दिखाया जाता है लेकिन जब हम उन्हें एक स्त्री की नजर से देखते है। तो उसकी दूसरी ही तस्वीर दिखायी देती है। युध्दो और विश्व युध्दों के परिणाम सबसे अधिक स्त्रियों ने ही झेला है चाहे कोई राष्ट्र हो । यूगोस्लाबिया और क्रोएशिया, बोस्निया हर्जेगोविना में यू0एस0ओ0 के शांति सैनिको की भूमिका स्त्रियों के मामले में बेहद नकारात्मक थी। किसी भी तरह का सैनीकरण स्त्री के खिलाफ होता हैं सत्ता का रिश्ता शक्ति से होता हेै और शक्ति पुरूषत्व की अवधारणा का पोषक है इसलिए हर सत्ता और हर तरह का युध्द भी स्त्री के खिलाफ होता है। हमारे समाज में पुरूष के भीतर जो हिंसा भाव हैए यह किसी युध्द से कम नही है। युध्द का दुनिया के पैमाने पर एक बडा उद्योग है। युध्द पर होने वाला खर्च कई जरूरी व विकास के मानवीय खर्चो को खत्म कर उसके औचित्य को खत्म कर देता है सरकारो की शान्ति वार्ताए असफल हो जाने पर भी स्त्रियाॅ शान्ति वार्ता जारी रखती हे युध्द करने वाले स्त्री को केवल एक देह के रूप में देखते है। स्त्री मुलतः युध्द विरोधी होती है और युध्द मूलतः स्त्री विरोधी। उक्त बाते जे0एन0यू0 के भरतीय भाषा केन्द्र की प्रोफेसर गरिमा श्रीवास्तव ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की केन्द्रीय संास्कृतिक समिति द्वारा आयोजिम विशिष्ट व्याख्यान में युध्द और स्त्री विषय पर बोलते हुए कही । कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो0 आर0एल0हाॅगलू ने इस व्याख्यान माला के महत्व पर प्रकाश डाला उन्होने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गम्भीर अकादमिक माहौल बनाने के लिए इस तरह के व्याख्यानों को जरूरी कदम बताया। प्रो0 गरिमा श्रीवास्तव को शालए गुलदस्ता व स्मृति चिन्ह तथा कुलपति को गुलदस्ता भेंट कर सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष प्रो0 फातमी ने स्वागत किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रो0 अनीता गोपेश ने दिया। एवं संचालन डाॅ0 सुर्य नारायण ने किया।  आरम्भ में प्रो0 गरिमा श्रीवास्तव की पुस्तक देह ही देश को लोकार्पण कुलपति महोदय ने किया। गोष्ठी में प्रा0 संतोष भदौरिया, प्रो0 अनामिका राय, डाॅ0 रूपेशसिंह, डा0 मार्तन्डसिंह प्रो0 रामचन्द्र, प्रो0 आशुतोष कुमार, डाॅ0 सूर्या नारायण, नाजिया नफीस, प्रो0 मुस्ताक अली, संख्या में शिक्षक, शोधछात्र व छात्र/छात्राएॅ मौजूद थे।
 
 
परीक्षा नियंत्रक, इ0वि0वि0ः
1.    विधि (आनर्स) द्वितीय, चतुर्थ एवं छठाॅ सेमेस्टर सत्र 2017-18 के भूतपूर्व छात्र/छात्राओं को पुनः सूचित किया जाता है कि यदि वे अपने आवेदन पत्र एवं शुल्क जमा नहीं कर पाये हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत वे अपना आवेदन पत्र एवं शुल्क दिनांक 12.03.2018 से 17.03.2018 तक सम्बन्धित इकाई में जमा करें। इस तिथि के पश्चात कोई भी आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किये जायेंगे।
 
2.    एल0एल0एम0 भाग-2, (पुराना पाठ्यक्रम) सत्र 2017-18 के भूतपूर्व छात्र/छात्राओं को पुनः सूचित किया जाता है कि यदि वे अपने आवेदन पत्र एवं शुल्क जमा नहीं कर पाये हैं तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत वे अपना आवेदन पत्र एवं शुल्क दिनांक 12.03.2018 से 17.03.2018 तक सम्बन्धित इकाई में जमा करें। इस तिथि के पश्चात कोई भी आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किये जायेंगे।