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University Placement Officer, AU
Programme details of the Azim Premji Foundation Campus Placement Drive – 11th November, 2017 have been shared with the participants on their registered email ids. For any assistance, feel free to contact Sunil Singh, M – 9312892412, Shaswat, M – 7317074797, E-mail:placementuoa@gmail.com
 
Head, Department of Electronics and Communication, AU:
“18 students of Department of Electronics and Communication, University of Allahabad have been selected in TCS Ltd., a prestigious Multinational Company through test/ interview held on November 6-8, 2017
 
Coordinator, B.A.LLB. (Hons) Five year Integrated Course, AU:
This is to inform you that the U.P. State Legal Services Authority and the University of Allahabad organized “Legal Services Day” Under “which Legal aid Clinic” in the New Building of the Faculty of Law has been inaugurated by the chief Guest of the function Hon’ble Mr. Justice Dilip Baba Sahib Bhosle, Hon’ble chief Justice, Allahabad High Court in which Hon’ble Mr. Justice Arun Tandon, Judge, Allahabad High Court was the Guest of Honor and the function was presided over by Prof. Rattan Lal Hangloo, Vice-Chancellor of the University of Allahabad and also participated by several Hon’ble Judges of the Allahabad High Court, the Faculty Member/Officers/Staff and the Faculty students.
 
Head, Department of Defence & Strategic Studies, AU: 
रक्षा एवं स्त्रातेजिक अध्ययन (एम0ए0/एम0एस0सी0 प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर) विषय के सभी छात्र/छात्राओं को सूचित किया जाता है कि उनकी मध्यावधि परीक्षा की लिखित परीक्षा निम्नलिखित तिथियों को सम्पन्न होगी। उक्त परीक्षा में सभी छात्र/छात्राओं की उपस्थिति अनिवार्य होगी। प्रथम पेपर 16 नवम्बर, 2017, द्वितीय पेपर 17 नवम्बर 2017, तृतीय पेपर 20 नवमबर 2017, चतुर्थ पेपर 21 नवम्बर 2017
 
विभागाध्यक्ष, अर्थशास्त्र विभाग, इ0वि0वि0ः
अर्थशास्त्र विभाग के समस्त शोध छात्रों को सूचित किया जाता है कि प्रो. मनीशा दुबे, अध्यक्षा अर्थशास्त्र विभाग, गुरू घासी दास विश्वविद्यालय, विलासपुर , छत्तीसगढ़ दिनांक 10.11. 2017 को 11 बजे कमरा नं. 7 में  व्याख्यान देगें। समस्त शोध छात्र उपरोक्त व्याख्यान में उपस्थित होकर लाभान्वित हों।
 
विभागाध्यक्ष, उर्दू विभाग, इ0वि0वि0ः
आज दिनांक 09 नवम्बर 2017, को उर्दू विभाग इलाहाबाद विश्वविद्यालय में उर्दू के महान दार्शिनिक और कवि अल्लामा इकबाल की जन्म तिथि के अवसर पर एक विसीय संगोष्ठी का आयोजन किया । ये आयोजन शोधछात्रों की अन्जुमन बज्म तामीर -ए-अदब की तरु से किया गया। इसमें विश्वविद्यालय के विभिन्न शिक्षकों और शहर की मशहूर हस्तियों ने शिरकत की। संगोष्ठी की शुरूआत उमैर हुसामी के तिलावत ए कल्लम पाक से हुआ। इसके बाद विभागाध्यक्ष प्रो0 शबनम हमीद ने अतिथिजनों का स्वागत किया और प्रो0 के0एस0 मिश्रा, डीन संकाय कला को गुलदस्ता पेश किया। इस अवसर पर कुल 6 लेख पढें गये। पहला लेख विभागाध्यक्ष प्रो0 शबनम हमीद ने इकबाल का नया मोताला और मानवियत के शीर्षक से पढा। जिसमें उन्होने इकबाल की शायरी में विज्ञान की तलाश की । उन्होंने कहा कि इकबाल की शायरी अध्यात्म और भौतिकता का मिला जुला असर  रखती है। उनके यहाॅ अलौकिक बाते तो मिलती ही हे साथ ही साथ वैज्ञानिक बिन्दुओं,अणु और परमाणु की शक्ति पर भी इकबाल की शायरी में इशारे मिलते है। दूसरा लेख प्रो0 अली अहमद फातमी ने पढा। उन्होंने कहा कि इकबाल लेनिन के हुजूर में यह नजम इकबाल के साम्यवादी नजरिए को पेश करती है।इकबाल पहले उर्दू के शायर है जिन्होंने इकबाल शब्द को राजनीतिक तौर पर इस्तेमाल किया। इस गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रो0 के0एस0मिश्रा ने इकबाल के जन्म दिवस पर सबको मुबारकबाद पेश की । उन्होंने कहा कि इकबाल की शायरी को एंतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए, वो सिर्फ एक धर्म के कवि नहीं थे । उन्होंने कहा उनकी शायरी हमारी जिन्दगी के हर मोड पर प्रयोगदायक है। तीसरा लेख डाॅ0 संजय कुमार ने पढा उन्होने अपने लेख में कहा इकबाल की शायरी में वैदिक बातों की खोज की जा सकती है उन्होंने उदाहरण के द्वारा अपने बात की पुष्टि भी की। चैथा लेख डाॅ0 अब्दुल मोही ने पढा  उन्होंने अपने लेख में गालिब और इकबाल के तालुक से कई बिन्दुओं पर बात की । पाॅचवा और छठा लेख, अरशद अली और सूर्यप्रकाश राव ने पढा। अन्त में धन्यवाद ज्ञापन रिसर्च छात्र नेदामोइ्रद ने किया  इस प्रोग्राम का संचालन सफीना समावी ने किया। इस अवसर पर विख्यात कवि जफर सिदिद्की , डाॅ0 जफर उल्ला अंसारी, डाॅ0 मो0 काशिफ, डाॅ0 ताहिरा परवीन, डाॅ0 मो0 अफजल, डाॅ0मो0 नौशाद, मो0 फहीम, विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र/छात्राएं उपस्थित थे।
डाॅ0मो0 नौशाद, मो0 फहीम, विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र/छात्राएं उपस्थित थे।
 
विभागाध्यक्ष, हिन्दी विभाग, इ0वि0वि0ः
लेखक को राजनैतिक संकीर्णता का अतिक्रमण करने वाला होना चाहिए - प्रो0 गोपेश्वर सिंह
समाजवादी चिंतक एवं प्रसिद्ध आलोचक प्रो0 रघुवंश की स्मृति में आयोजित ‘समाजवादी आंदोलन, साहित्य और प्रो0 रघुवंश’ विषय पर चैथा स्मृति व्याख्यान देते हुए प्रसिद्ध आलोचक प्रो0 गोपेश्वर सिंह ने प्रो0 रघुवंश का भावपूर्ण स्मरण किया। उन्होंने समाजवादी आंदोलन और स्वाधीनता आंदोलन के रिश्ते से अपना व्याख्यान आरम्भ करते हुए समाजवादी आंदोलन के विकास को विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि समाजवादी आंदोलन पर गाँधी के विचारों का गहरा प्रभाव रहा है। गाँधी अपने समय की श्रेष्ठतम प्रतिमाओं से न केवल परिचित थे, बल्कि उनके गहरे मित्र थे। गाँधी और टैगोर की मैत्री एक उदाहरण है। लोहिया, जयप्रकाश और नरेंन्द्रदेव को कला, साहित्य और संस्कृति का गहरा अध्ययन था, कलाकारों-साहित्यकारों से बहुत निकट के रिश्ते थे। समाजवादी आंदोलन ने राजनीति, साहित्य और कला की त्रिवेणी प्रवाहित की। समाजवादी आंदोलन की मूल मान्यता थी कि नेता को प्रणेता (रचनाकार) होना चाहिए। प्रो0 रघुवंश इसी धारा के चिंतक-विचारक थे। वे एक ‘एक्टिविष्ट बुद्धिजीवी’ थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो0 राजेन्द्र कुमार ने प्रो0 रघुवंश को साहित्य के मर्मज्ञ के साथ साहित्य के प्रति ममतालु बुद्धिजीवी बताया। उन्होंने प्रो0 रघुवंश के लोकतांत्रिक व्यवहार और व्यक्तित्व के विविध पक्षों को रेखांकित किया। उन्होंने प्रो0 रघुवंश के सम्यक पुनर्मूल्यांकन का प्रस्ताव किया। आरंभ में शाॅल, फूलों का गमला और प्रो0 रघुवंश की पुस्तक देकर अतिथियों का सम्मान हुआ। संचालन और स्वागत हिन्दी विभाग के डाॅ0 सूर्य नारायण एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो0 रघुवंश की पुत्री प्रो0 सुजाता रघुवंश ने किया। प्रो0 के0एस0 मिश्र, प्रो0 ए0ए0 फातमी, प्रो0 मीरा दीक्षित, प्रो0 मुश्ताक अली, प्रो0 प्रणय कृष्ण, प्रो0 कृपाशंकर पांडेय, डाॅ0 लालसा यादव, डाॅ0 भूरेलाल, डाॅ0 कल्पना वर्मा, डाॅ0 अनुपम आनंद, डाॅ0 संतोष कुमार सिंह, डाॅ0 मुदिता तिवारी, डाॅ0 रामचन्द्र, डाॅ0 परवेज अंसारी सहित भारी संख्या में शोधछात्र व छात्र उपस्थित रहे।